
कविता
आशा मोहिनी
मौन बोलता है खामोशी सुनती है
भावनाए बिन पंख उड़ती है
सोचो गर लग जाए मुझको पंख तो
बन जाऊ में भी नील गगन का हिस्सा
और उड़ जाऊ दूर चंद्रमा के पास
बचपन की उस कहानी को सच करने
जो दादी नानी सुनाती थी
कि दूर गगन से आती है कोई परी
और देती है हजारो खुशिया
गर यह सच है तो क्यो है
हमारे यहाँ बचपन इतना उदास
आशा मोहिनी
मौन बोलता है खामोशी सुनती है
भावनाए बिन पंख उड़ती है
सोचो गर लग जाए मुझको पंख तो
बन जाऊ में भी नील गगन का हिस्सा
और उड़ जाऊ दूर चंद्रमा के पास
बचपन की उस कहानी को सच करने
जो दादी नानी सुनाती थी
कि दूर गगन से आती है कोई परी
और देती है हजारो खुशिया
गर यह सच है तो क्यो है
हमारे यहाँ बचपन इतना उदास