Tuesday, June 14, 2011

मेरा जीवन


जब भी मैं
रेलवे स्टेशन जाती
ठहर जाती
रेल की पटरियों
पर मेरी नज़र
ये पटरियां
दो बिछुड़े हुए को मिलाती
मुसाफिरों को भी
एक जगह से दूसरी जगह पहुचाती
लेकिन खुद कभी नहीं मिलती
कुछ ऐसा ही है
मेरा जीवन
हम साथ तो चलते है
पर कभी मिलते नहीं !

उसी तरह


जिस तरह मयूर
काली घटाओ को देख
कूकने लगते है
प्रेमिका बारिश की फुहारों से
अपने तनमन को भिगोने लगती है
नववधू अपने पति के
जल्द घर लौटने की
राह तकने लगती है
उसी तरह बारिश
धरती की प्यास बुझाने के लिए
खुद को मिटा देती है
और समां जाती है
धरती के गर्भ में
इस उम्मीद से
कि एक बार फिर
बादल उसे
अपनी आगोश में लेगा
और रिमझिम फुहारों के रूप में
धरती पर बरसा देगा

रिश्ते


मेरी आँखों में आंसू है
मगर आंसू ख़ुशी के है
खुद को खोकर तुझको पाया
ये रिश्ते जिंदगी है
हमे यूँ न भूल सकोगे तुम
जा भी न सकोगे यूँ हमसे दूर तुम
पता नहीं तुझको हमदम मेरे
वक़्त के इन फासलों से
दिल और भी करीब होता है

मेरी तन्हाई


जब कोई नहीं होता साथ मेरे
वो मेरे साथ होती है
सिसकती खामोश रातो में
मुझे ढडांस बंधा जाती है
दिल कि गेहरइयो में
बना ली है जगह उसने
जीवन भर साथ निभाने कि कसमे भी खाई है
जी हाँ वो और कोई नहीं
सिर्फ तुम, सिर्फ तुम, सिर्फ तुम हो
मेरी तन्हाई