
न हम मिले न तुम मिले
फिर भी है मिले मिले
न तुमने देखा न हमने देखा
फिर भी लगते है जाने पहचाने
न तुम्हारा पता न मेरा
फिर भी हम दोनों का एक ठिकाना
कुछ तो रज़ा होगी इसमें खुदा की
जो हम तुम मिले कुछ ऐसे
जैसे सीप में मोती, दिए की ज्योति
चाँद की चांदनी, राग की रागिनी
इधर क्या कभी तुमने
अपने दिल की धड़कन को सुना है
कि तुम्हारा दिल मेरे लिए
और मेरा दिल तुम्हारे लिए धडकता है
मैं होती हूँ तुम्हारे गम से विचलित
और मेरा दर्द तुमको खलता है
मेरी ख़ुशी में तुम हँसते हो
तुम्हारी ख़ुशी से मैं खुश होती हूँ
कभी सोचा है तुमने ऐसा क्यों है
क्यों रहता है
हम दोनों को एक दूजे का इंतज़ार
ये क्या है, ये क्यों है न तुम जानो न हम
लेकिन फिर भी हम दोनों है
एक दूजे के लिए
एक दूजे के मन में
शायद कभी हम न मिले
लेकिन फिर भी जिस तरह
हम रोज़ रात को मिलते है कुछ ऐसे
जैसे कभी जुदा ही नहीं थे
तुम मुझमे और मैं तुम में समां जाती हूँ
और एक सपनीली दुनिया में खो जाते है हम दोनों
कब तक चलेगा ये सिलसिला
न तुम जानो न हम
लेकिन प्रार्थना है ये ऊपर वाले से
हम कभी न मिलते हुए हमेशा मिले रहे
और एक दूजे में यु ही खोए रहे