Friday, November 19, 2010

जिंदगी


रोज़ नयी पहेली सी मेरे सामने आती है तू
ऐ जिंदगी इतने गम कहा से लाती है तू
कभी किसी को हसाती कभी किसी को रूलाती है तू
ऐ जिंदगी इतनी चालबाजिया कहा से सीख जाती है तू
कभी किसी को मिलाती कभी किसी को बिछोड्ती है तू
ऐ जिंदगी इतनी लुकाछिपी कैसे खेल जाती है तू
ये बता दे हमे ऐ जिंदगी
सबको रोज़ एक नया रूप दिखलाती है तू
ऐ जिंदगी इतनी रंगिनिया कहा से लाती है तू
और क्या है तेरे दामन में छिपा
ऐ जिंदगी आज ये बता दे तू
एक छोटे से जीवन में
कितना कुछ दिखा देती है तू
रोज़ नयी पहेली सी मेरे सामने आती है तू
ऐ जिंदगी इतने गम कहा से लाती है तू

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