Thursday, August 27, 2009

मौन


कविता
आशा मोहिनी
मौन बोलता है खामोशी सुनती है
भावनाए बिन पंख उड़ती है
सोचो गर लग जाए मुझको पंख तो
बन जाऊ में भी नील गगन का हिस्सा
और उड़ जाऊ दूर चंद्रमा के पास
बचपन की उस कहानी को सच करने
जो दादी नानी सुनाती थी
कि दूर गगन से आती है कोई परी
और देती है हजारो खुशिया
गर यह सच है तो क्यो है
हमारे यहाँ बचपन इतना उदास