Wednesday, June 16, 2010

ख्वाइश


थक गयी हूँ बहुत मैं

तुम्हारे सहारे की मुझको जरूरत है

बना लो मुझको अपना तुम

यही मेरी खवाइश है

अपना न बना सको

तो कोई बात नहीं

समां जाओ मुझमे

सिमटा लो अपने अन्दर

जकड लो अपनी बाँहो में

यही मेरी गुजारिश है

और यही मेरी खवाइश है

Monday, June 14, 2010

वो प्यार है


सुबह उठ के आँखे खोलने से पहेले

जिसका चेहरा देखने की इच्छा हो वो प्यार है

मंदिर में दर्शन करते वक़्त किसी के

पास खड़े होने का एहसास हो वो प्यार है

पूरे दिन की थकान जिसके साथ बेठने की

कल्पना से ही दूर हो जाये वो प्यार है

सर किसी कि गोद में रख कर लगे की

मन हल्का हो गया वो प्यार है

लाख कोशिश करके भी

जिस से नफरत न कर सके दिल

और न ही भूल सके वो प्यार है

(ये मैंने नहीं ओशो ने कहा है, जो सच में जिंदगी का आइना है )

Sunday, June 13, 2010

यादो के झरोके


उस दिन तुमने और मैंने

पहली बार देखी थी बर्फ गिरते हुए

रुई के फाहे भर लेना चहाती थी मैं अपनी मुट्टी में

मैं समेट लेना चहाती थी इन लम्हों को

हमेशा के लिए अपने दामन में

और तुम मेरी ख़ुशी को

अपनी बाहों में भर लेना चहाते थे

चहाते थे तुम कि मैं पहेली स्त्री बनू

जो इन बर्फ रुपी फाहों पर

तुमसे भी पहेले चलू

तुम्हारी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए

तुम्हारा हाथ छोड़ कर मैं चल पड़ी थी

प्रकीती के इस अद्भुत नज़ारे पर

लेकिन एक बार फिर मैं जीना चाह्ह्ती हूँ

उस पल को

तुम्हारा हाथ थम कर चलना

चहाती हूँ उन रुई के फाहों पर