
सुबह उठ के आँखे खोलने से पहेले
जिसका चेहरा देखने की इच्छा हो वो प्यार है
मंदिर में दर्शन करते वक़्त किसी के
पास खड़े होने का एहसास हो वो प्यार है
पूरे दिन की थकान जिसके साथ बेठने की
कल्पना से ही दूर हो जाये वो प्यार है
सर किसी कि गोद में रख कर लगे की
मन हल्का हो गया वो प्यार है
लाख कोशिश करके भी
जिस से नफरत न कर सके दिल
और न ही भूल सके वो प्यार है
(ये मैंने नहीं ओशो ने कहा है, जो सच में जिंदगी का आइना है )
Sach mein..... yeh panktiyaan pyaar ki sari gehraiyon...sari bhavnaon.. sari anubhutiyon ko byaan kar deti hain. Osho ki itni umda panktiyaan padane k liye dhanyawad.
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