
क्या कभी किसी ने सोचा है
कब्र की भी एक दुनिया होती है
कब्र में भी कुछ ज़िन्दगिया
बरसो तक इंतज़ार करती है
किसी एक का
और कई-कई वर्षो तक
निरंतर जीती रहती है
ये ज़िन्दगिया इस आस में
कि एक दिन कोई आएगा
उनकी कब्र पर एक दिया जलाने
और रोशन कर जाएगा
उनकी सूनी और वीरान जिंदगी को
उसी तरह मैं भी
शरीर रूपी कब्र में
जी रही हूँ न जाने कब से
कि कभी तो आएगा वो
जो मुझे शरीर रुपी कब्र से
मुक्ति दिलाएगा और अपनी
प्यार भरी बाहों की आगोश में
चैन की नींद सुलाएगा, चैन की नींद सुलाएगा चैन की नींद सुलाएगा
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