
तुम्हारे इतने पास आकर
अब दूर जाना खौफ लगता है
एक कदम पीछे मुड़कर देखती हूँ तो
सीधा रास्ता भी टेड़ा लगता है
तुमको इतना अपना बना चुकी हूँ
कि तुमको खोने से डर लगता है
कही ऐसा न हो इसी डर के बीच
एक दिन मैं खुद को ही खोने लगू
तुम्हारे इतने सपने देख चुकी हूँ
कि काली रात भी रंगीली लगती है
कही ऐसा न हो जब सपने से जागू
वेह टूट टूट कर बिखरने लगे
इतना प्यार करने लगी हूँ तुम्हे
कि बेठे बेठे आँखे नम हो जाती है
ऐसा न हो कही
तुमको मिले गर एक दर्द
मेरी साँसे ही रूक जाए
तुम्हारे बारे में इतना सोचा कि
सोच का मतलब ही तुम बन गए
भीड़ के बीच भी लगता है
जैसे तन्हा जी रही हूँ मैं
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