Saturday, December 15, 2012

अजनबी




भूल गया कोई मुझे इस कदर
कि  यकीन नहीं आता
घर से वो लोटा तो जरुर
मगर अजनबी होकर
हा वो तुम ही हो......      


Thursday, May 24, 2012

विवश


कितनी विवश होती है जिंदगी मौत के आगोश में
कितना विवश होता है प्यार रिवाजों के बंधन में
सोचा न था कि कुछ यू हो जायेगी जिंदगी हमारी
गुजरेंगे रोज़ दिन उनके इंतज़ार में !

लालची निगाह

वो देखता है
घूरता है और
नज़रे घूमा लेता है
ठीक वैसे ही
जैसे एक कुत्ता
हड्डी को देख
ललचाता है !

नहाने से रोको और सर मुडवा दो

क्या आपको लगता है कि किसी भी बलात्कार के लिए जिम्मेवार खुद महिला ही होती है अगर आपमें से अधिकाँश का जवाब हा है तो आप गलत है क्योकि कोई महिला ये नहीं चाएगी कि उसके साथ बलात्कार जैसी घिनोनी हरक़त या फिर  ज़बरदस्ती हो ! लेकिन इसे एक विडम्बना ही कहा जाएगा कि बलात्कार के लिए दोषी महिला को ही माना  जाता है और पुरूषों को इस इलज़ाम से बाइज्ज़त बरी ही किया जाता है !
 
आपको बता दे कि पिछले दिनों  जिम्बावे में एड्स से बचने के लिए एड्स अवेयरनेस  विषेय पर एक सेमीनार का आयोजन किया गया जिसमे कहा गया की  अगर महिलाओ का सर मुडवा दिया जाए और उनको नहाने से रोका जाए तो एड्स से बचा जा सकता है ! ताजुब की बात ये है की ये विचार किसी भारतीय के नहीं बल्कि जिम्बाब्वे के सेनेटर मॉर्गेन फिमेई के है ! इस पार्ल्यामेंटरी वर्कशॉप में जिम्बाब्वे के सेनेटर मॉर्गेन फिमेई के इस बयान से यह साफ़ होता है की हम जितने भी मोर्डेन क्यों न हो जाए  हमारी सोच आज भी वही सदियों पुरानी ही है ! सिर्फ इतना ही नहीं उनके इस बयान ने ये साफ़ कर दिया कि औरतो की स्थिति दुसरे मुल्को में भी कोई खास अच्छी नहीं है ! 
 हालाकि  फिमेई के इस बयान की  काफी आलोचना भी हुई,  लेकिन सवाल ये उठता है की फिमेई ये बयान देकर आखिर क्या साबित करना चाहते है ? फिमेई को शायद ये नहीं पता की न सिर्फ भारत में बल्कि दुसरे देशो में भी बलात्कार की शिकार सिर्फ महिलाए ही नहीं बल्कि छोटी-छोटी उम्र की बच्चिया  भी होती है जिनका  सजने सवरने से कोई सरोकार नहीं होता  और न ही  इन  मासूमो का सजने सवरने से कोई सम्बन्ध होता है ! लेकिन बावजूद इसके  जाने अनजाने यह बच्चिया बलात्कारियो की हवस का शिकार बनती ही रहेती है!  और ता उम्र बदनामी के  दंश के साथ जीने को मजबूर होती है जिसमे उनका कोई कसूर नहीं होता !
 
कुछ साल पहले डेल्ही के तिमारपुर की  ही एक घटना है जहा एक अंधे अध्यापक ने अपनी ही एक अंधी छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया था !  ३८ साल के राजेन्द्र नामक इस आदमी ने २० साल की  एक छात्रा के साथ इस घिनोनी हरक़त को अंजाम दिया ! इस घटना से ये साफ़ होता है कि हमारे इस सभ्य समाज में जिस तरह बलात्कार के लिए औरत के कपड़ो और उसकी चाल ढाल को जिम्मेवार बताया जाता है वास्तव में वो  कोई वजह नहीं होती ! क्योकि एक अंधे शिक्षक द्वारा की गयी इस हरक़त को आप क्या कहेंगे ! मतलब साफ़ है  छोटे व तन दिखाऊ कपडे, एक्सेपोसेर जैसे शब्दों का हवाला देकर ये मर्द खुद का बचाव करते है और सारा दोष एक औरत के सर मड  देते है !
हाल ही में आई राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट का ज़िक्र करे तो पता चलता है ७ साल की मासूम बच्चियों से लेकर ७२ साल तक की अधेड़ उम्र की महिलाये दुष्कर्म का शिकार होती है ! रिपोर्ट में यह भी कहा गया है की सामूहिक बलात्कार के ४४ प्रतिशत मामलो में से ३९ प्रतिशत मामलो में नाबालिग ही बलात्कारियो की हवस  का शिकार बनती है ! इसके अलावा दिमागी या शारीरिक  तौर पर विक्षिप्त १७ प्रतिशत लडकिया जाने अनजाने बलात्कार का शिकार बनती है !

Tuesday, January 3, 2012

प्रेम


प्रेम में आप जितना भी दे
आप फिर भी महसूस करते है
कि आपने पर्याप्त नहीं दिया
आप मानते है,
कि जो आपने दिया है वेह थोड़ा है !
यदि आप महसूस करते है
कि आपने बहुत दिया है तो
उसका मतलब
प्रेम में कुछ न कुछ कमी रह गयी है

Monday, August 1, 2011

कब्र में जीते लोग


क्या कभी किसी ने सोचा है
कब्र की भी एक दुनिया होती है
कब्र में भी कुछ ज़िन्दगिया
बरसो तक इंतज़ार करती है
किसी एक का
और कई-कई वर्षो तक
निरंतर जीती रहती है
ये ज़िन्दगिया इस आस में
कि एक दिन कोई आएगा
उनकी कब्र पर एक दिया जलाने
और रोशन कर जाएगा
उनकी सूनी और वीरान जिंदगी को
उसी तरह मैं भी
शरीर रूपी कब्र में
जी रही हूँ न जाने कब से
कि कभी तो आएगा वो
जो मुझे शरीर रुपी कब्र से
मुक्ति दिलाएगा और अपनी
प्यार भरी बाहों  की आगोश में
चैन की नींद सुलाएगा,  चैन की नींद सुलाएगा  चैन की नींद सुलाएगा