
मैं भरता हूँ
आता हूँ और गिर जाता हूँ
कोई मिटा देता है मुझे
हाथ या फिर किसी कपडे से
या फिर खुद ही सूख जाता हूँ
फिर फिर न आने की हिदायत भी देता है कोई मुझे
लेकिन मेरी नियति ही कुछ ऐसी है
आना, भरना , छलकना
मिटा देना या फिर खुद ही मिट जाना
जी हा मैं आंसू हूँ !



