
आज तुमने जब मुझे छुआ
तो मुझे कुछ न हुआ
आज तुम्हारे स्पर्श में वो मादकता नहीं थी
जो पहेले हुआ करती थी
आज तुम्हारे छुने से मेरे रोए खड़े नहीं हुए
आज तुम्हारे छूने से मेरा दिल धक् धक् नहीं किया
न ही तुम्हारे स्पर्श से मेरी आँखे बंद हुई
मेरे जिस्म पर रेंगती तुम्हारी अंगुलिया ऐसी प्रतीत होती है
जैसे मेरे जिस्म पर साँप रेंग रहे हो
लगता है तुम्हारी तरह बदल गए तुम्हारे एहसास भी
और तुम्हारी छुअन कि मादकता भी घुल गयी
किसी और कि चाहत में




