प्रेम में आप जितना भी दे आप फिर भी महसूस करते है कि आपने पर्याप्त नहीं दिया आप मानते है, कि जो आपने दिया है वेह थोड़ा है ! यदि आप महसूस करते है कि आपने बहुत दिया है तो उसका मतलब प्रेम में कुछ न कुछ कमी रह गयी है
क्या कभी किसी ने सोचा है
कब्र की भी एक दुनिया होती है
कब्र में भी कुछ ज़िन्दगिया
बरसो तक इंतज़ार करती है
किसी एक का
और कई-कई वर्षो तक
निरंतर जीती रहती है
ये ज़िन्दगिया इस आस में
कि एक दिन कोई आएगा
उनकी कब्र पर एक दिया जलाने
और रोशन कर जाएगा
उनकी सूनी और वीरान जिंदगी को
उसी तरह मैं भी
शरीर रूपी कब्र में
जी रही हूँ न जाने कब से
कि कभी तो आएगा वो
जो मुझे शरीर रुपी कब्र से
मुक्ति दिलाएगा और अपनी
प्यार भरी बाहों की आगोश में
चैन की नींद सुलाएगा, चैन की नींद सुलाएगा चैन की नींद सुलाएगा
जब भी मैं रेलवे स्टेशन जाती ठहर जाती रेल की पटरियों पर मेरी नज़र ये पटरियां दो बिछुड़े हुए को मिलाती मुसाफिरों को भी एक जगह से दूसरी जगह पहुचाती लेकिन खुद कभी नहीं मिलती कुछ ऐसा ही है मेरा जीवन हम साथ तो चलते है पर कभी मिलते नहीं !
जिस तरह मयूर काली घटाओ को देख कूकने लगते है प्रेमिका बारिश की फुहारों से अपने तनमन को भिगोने लगती है नववधू अपने पति के जल्द घर लौटने की राह तकने लगती है उसी तरह बारिश धरती की प्यास बुझाने के लिए खुद को मिटा देती है और समां जाती है धरती के गर्भ में इस उम्मीद से कि एक बार फिर बादल उसे अपनी आगोश में लेगा और रिमझिम फुहारों के रूप में धरती पर बरसा देगा
मेरी आँखों में आंसू है मगर आंसू ख़ुशी के है खुद को खोकर तुझको पाया ये रिश्ते जिंदगी है हमे यूँ न भूल सकोगे तुम जा भी न सकोगे यूँ हमसे दूर तुम पता नहीं तुझको हमदम मेरे वक़्त के इन फासलों से दिल और भी करीब होता है
जब कोई नहीं होता साथ मेरे वो मेरे साथ होती है सिसकती खामोश रातो में मुझे ढडांस बंधा जाती है दिल कि गेहरइयो में बना ली है जगह उसने जीवन भर साथ निभाने कि कसमे भी खाई है जी हाँ वो और कोई नहीं सिर्फ तुम, सिर्फ तुम, सिर्फ तुम हो मेरी तन्हाई
जिंदगी के कागज़ बिखरे पड़े है सोचती हूँ जब भी इन्हें ठीक करने की तो कोई हवा का झोका आकर इन सूखे पत्तो को बिखरा देता है फिर असहाय सी मैं एकटक देखती रहती हूँ उन बिखरे मुरझाये पत्तो को जिनका अब कोई वजूद नहीं लेकिन जब इनमे रंग था उत्साह था और जीने की ललक थी तब किसी ने डाल से तोड़कर कुचल दिया इन्हें मिटा दिए इनके सारे अरमान और इस तरह मेरी जिंदगी एक सूखा पत्ता बन गयी